Top 5 motivational story for students in hindi 2024

 1.सपने की उड़ान

एक छोटे से गाँव में रहने वाले रामू नामक लड़के का सपना था कि वह एक दिन अपने गाँव के बाहर के बड़े शहर में पढ़ाई करेगा। लेकिन रामू के पास पर्याप्त पैसे नहीं थे और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी।

एक दिन, रामू के स्कूल में एक मोटिवेशनल स्पीच हुआ। वहाँ आए हुए विद्यार्थियों को बताया गया कि सपने सच करने के लिए उन्हें मेहनत करनी होगी।

रामू ने उस दिन से मेहनत करना शुरू कर दिया। वह दिन-रात पढ़ाई करता रहा और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहा। उसने स्कूल के टॉप किया और एक प्रतिष्ठित कॉलेज में एडमिशन प्राप्त किया।

रामू ने मेहनत और आत्मविश्वास के जरिए अपने सपने को पूरा किया और एक दिन अपने गाँव का नाम रोशन किया। उसकी यह कहानी आज भी उस गाँव में प्रेरणा का केंद्र है और उसने वहाँ के बच्चों को सपनों की उड़ान भरने की प्रेरणा दी।

रामू की यह कहानी गाँव के बच्चों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन गई। उन्होंने सिखाया कि मेहनत और आत्मविश्वास से हर सपना साकार किया जा सकता है। उसकी कहानी ने गाँव के छोटे-मोटे बच्चों में उत्साह और विश्वास की किरणें भर दी।

रामू की मेहनत और उसका सपना पूरा करने की इच्छा आज भी उस गाँव में जीवित है। उसकी कहानी गाँव के बच्चों को यह सिखाती है कि अगर उनमें सही दिशा और मेहनत की भावना हो, तो वे किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकते हैं।

रामू ने दिखाया कि अगर किसी के पास एक सपना हो और उसके पीछे पूरी ईमानदारी और लगन से काम किया जाए, तो उस सपने को पूरा करना मुश्किल नहीं होता। उसकी कहानी ने साबित किया कि हर किसी के लिए सपनों को पूरा करना संभव है, चाहे वो कितना भी छोटा या कितना भी बड़ा क्यों ना हो।

मोटिवेशनल स्टोरी फॉर स्टूडेंट्स

एक गाँव में एक छोटे से लड़के का नाम राहुल था। राहुल बहुत ही चतुर और होशियार था। वह हमेशा से अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने की इच्छा रखता था। उसके पास कोई भी बड़ा सपना नहीं था, बस एक छोटा सा सपना था कि वह एक दिन अपने परिवार की मदद करेगा और उन्हें खुशी देगा।

राहुल के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए उसने अपनी पढ़ाई छोड़ दी और किसानी में मदद करने लगा। लेकिन उसका सपना था कि वह पढ़ाई करेगा और अपने परिवार की स्थिति सुधारेगा।

एक दिन, उसके स्कूल में एक मोटिवेशनल स्पीच हुआ। उसमें स्पीकर ने कहा कि अगर कोई सच्चे दिल से किसी चीज को चाहता है तो उसे वह चीज पाने का मौका जरूर मिलता है।

राहुल ने उस दिन से पढ़ाई करना शुरू कर दिया। वह रात-दिन मेहनत करता और अपने सपने की ओर बढ़ता रहा। उसने अपनी पढ़ाई पूरी की और एक अच्छे कॉलेज में एडमिशन प्राप्त किया।

राहुल ने अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत से अपने सपने को पूरा किया और अपने परिवार की मदद करके उन्हें गर्वित किया। उसकी यह कहानी गाँव के बच्चों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बनी और उन्हें यह सिखाया कि मेहनत से हर सपना साकार किया जा सकता है।

राहुल की कहानी गाँव के बच्चों के लिए एक मिसाल बन गई। उसने सिद्ध किया कि किसी के पास जितनी भी मुश्किलें क्यों ना हों, अगर उसके दिल में सच्ची इच्छा है और वह मेहनत करने को तैयार है, तो वह अपने सपने को पूरा कर सकता है।

राहुल की कहानी ने साबित किया कि शिक्षा ही एक ऐसी शक्ति है जो हर मनुष्य को उसके लक्ष्य तक पहुंचा सकती है। उसने अपने जीवन से सिखा कि अगर कोई व्यक्ति विश्वास और मेहनत से अपने मकसद की ओर बढ़ता है, तो वह किसी भी परिस्थिति से निपट सकता है।

राहुल की यह कहानी उस समय के छात्रों के लिए भी एक प्रेरणास्त्रोत बनी जब वे स्कूल छोड़कर अपने भविष्य की दिशा में कदम बढ़ा रहे थे। उसने उन्हें यह सिखाया कि सपने पूरे करने के लिए उन्हें मेहनत करनी होगी और हर मुश्किल को पार करने के लिए तैयार रहना होगा।

Krishna motivational story in Hindi – कृष्णा जी की एक प्रेरणादायक कहानी

द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण की एक बार एक छोटे से गाँव में एक गरीब गोपालक रहता था। उसका नाम सुधामा था। सुधामा बहुत ही ईमानदार, निष्काम कर्मी और भगवान के भक्त थे। उनकी आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब थी, लेकिन वे हमेशा भगवान के प्रति श्रद्धा और आस्था लेकर जीते थे।

एक दिन सुधामा ने अपनी पत्नी से कहा, “मुझे लगता है कि हमें भगवान कृष्ण के दर्शन करने चलना चाहिए।” उनकी पत्नी ने उसे उसके गरीबी के कारण डराया, लेकिन सुधामा ने अपनी आस्था में पक्का रहकर कहा, “अगर हम ईमानदारी से और निष्काम भाव से भगवान के दर्शन करने जा रहे हैं, तो वह हमारी आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकते हैं।”

सुधामा ने एक छोटे से गोलियाँ चावल लेकर भगवान कृष्ण के मंदिर चले गए। वहां पहुंचकर उन्होंने अपनी आस्था के साथ भगवान कृष्ण को प्रणाम किया और उन्हें अपने साथ लाए गए चावल दिए।

भगवान कृष्ण ने सुधामा का स्वागत किया और उनके आसन पर बिठाया। उन्होंने चावल के एक बड़े ढ़ेर से उन्हें भोजन के रूप में प्रस्तुत किया। सुधामा ने भोजन किया और भगवान कृष्ण से भिक्षा मांगने के लिए वहां से चले गए।

जब सुधामा अपने गाँव पहुंचे तो उन्होंने देखा कि उनका गरीबी से सुधार हो गया है। उनके घर में सुख-समृद्धि की वातावरण बन गयी थी। भगवान कृष्ण ने सुधामा की ईमानदारी, भक्ति और निष्काम कर्म को देखकर उनकी सभी समस्याओं का समाधान किया था।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि भगवान कभी भी हमारी भक्ति, ईमानदारी और निष्काम कर्म को नजरअंदाज नहीं करते हैं। वे हमेशा हमारे साथ हैं और हमें हर कठिनाई से पार करने की शक्ति प्रदान करते हैं।

भगवान कृष्ण की यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि भगवान का ध्यान और भक्ति में होने से ही हमारी आत्मा को शांति और सुख की प्राप्ति होती है। सुधामा की ईमानदारी और निष्काम भक्ति ने भगवान कृष्ण को उनके पास आने पर मजबूर किया।

इस कहानी से हमें यह भी सीखने को मिलता है कि भगवान के समक्ष हमें धन-दौलत की चाह नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमें सच्चे मन से उनकी पूजा और सेवा करनी चाहिए। भगवान कृष्ण की कृपा से ही हमें वास्तविक सुख और शांति मिलती है।